Sunday, September 27, 2009

टॉप 10 सेक्टर

देश की अर्थव्यवस्था में आ रहे उफान की वजह से वर्ष 2008 में भी बूम वाले क्षेत्रों में नौकरियों की भरमार रहेगी। ऐसे में युवा इनसे संबंधित कोर्स करने को ही प्राथमिकता देंगे। खास बात यह है कि सरकार भी इस दिशा में प्रयासरत है और यही कारण है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत इस साल से पूरे देश में स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स खोलने पर अमल आरंभ हो जाएगा। इसके तहत युवाओं को मार्केट की डिमांड के मुताबिक ट्रेनिंग दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षो में कई क्षेत्र बडी तेजी से आगे बढे हैं, पर विडंबना यह है कि उनमें काम करने वाले योग्य लोग बमुश्किल मिल पा रहे हैं। ऐसे में स्किल्ड लोगों की कमी दूर करने के लिए निजी क्षेत्र के साथ-साथ सरकार को भी पहल करनी पडी है। हाल ही में एआईसीटीई के तत्वावधान में आयोजित एक उच्चस्तरीय सेमिनार में यह माना गया कि भारत का टेक्निकल एजुकेशन सिस्टम काफी पीछे चल रहा है। इस मौके पर एआईटीसीई के कार्यवाहक चेयरमैन प्रो. आरए यादव ने कहा कि टेक्निकल एजुकेशन के विकास को नया आयाम देने की शुरुआत की गई है।
तेजी से आगे बढते सेक्टर्स
विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल, रिअलॅ इस्टेट, एनिमेशन एवं गेमिंग, इंश्योरेंस व बैंकिंग, टेलीकम्युनिकेशन, आईटी/आईटीईएस, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी, मैनेजमेट और इंजीनियरिंग इस साल के टॉप 10 सेक्टर होंगे, जिनमें शिक्षा व प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार पाना काफी आसान होगा। इसके अलावा कुछ और सेक्टर भी ऐसे होंगे, जिनमें इस वर्ष बूम आने की उम्मीद है। इनमें प्रमुख हैं : ऑटोमोबाइल, एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर-फार्मा, टूर ऐंड टै्रवेल, इवेंट मैनेजमेंट, मीडिया आदि। आइए देखते हैं कि इस वर्ष उक्त टॉप 10 सेक्टर्स की क्या स्थिति रहेगी :
रिटेल
इस समय देश के रिटेल सेक्टर का आकार करीब दो खरब डॉलर के बराबर है। हालांकि, इसमें संगठित क्षेत्र का योगदान मात्र साढे छह अरब डॉलर के बराबर ही है। अनुमान है कि वर्ष 2010 तक संगठित क्षेत्र का रिटेल बाजार तेजी से बढते हुए 23 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। रिटेल देश का सबसे बडा निजी उद्योग है, जो देश के कुल जीडीपी में करीब 10 प्रतिशत का योगदान देता है। रिलायंस रिटेल के सीईओ रघु पिल्लई का कहना है कि रिटेल इंडस्ट्री में प्रशिक्षित लोगों की कमी को देखते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज रिटेल की पढाई के लिए एक विशेष विश्वविद्यालय खोलने पर विचार कर रही है।
रिअॅल इस्टेट
बढते शहरीकरण और अर्थ-व्यवस्था की मजबूती के चलते रिअॅल इस्टेट क्षेत्र तेजी से आगे बढ रहा है। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम (एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री) का मानना है कि इस क्षेत्र में अगले दस साल के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 30 अरब डॉलर हो जाने की उम्मीद है। वर्ष 2008 में इस क्षेत्र के 30 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने की संभावना है। एसोचैम के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत का कहना है कि वर्तमान में घरेलू रिअलॅ इस्टेट बाजार 14 अरब डॉलर का है। अगले दस साल में इसके 102 अरब डॉलर का हो जाने का अनुमान है। धूत ने यह भी कहा कि लोगों की खरीद क्षमता बढने और संगठित रिटेल की शुरुआत के कारण खपत का स्वरूप बदल गया है। इससे रिटेल परियोजनाएं छोटे शहरों और कस्बों में भी लगाई जा रही हैं। इन सब कारणों से निर्माण में आ रही तेजी के चलते इससे संबंधित हर क्षेत्र में बडी संख्या में काबिल लोगों की जरूरत महसूस की जा रही है। इनमें आर्किटेक्ट, सिविल इंजीनियर, प्रोजेक्ट मैनेजर, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव्स आदि प्रमुख हैं।
इंश्योरेंस एवं बैंकिंग
एलआईसी के सीनियर डिवीजनल मैनेजर (दिल्ली डिवीजन-2) राकेश कुमार का कहना है कि इंश्योरेंस सेक्टर 25-30 प्रतिशत वार्षिक की गति से विकास कर रहा है। इस दर को देखते हुए भारत के घरेलू बीमा बाजार का आकार वर्ष 2010 तक 60.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाने की उम्मीद है। इसकी पुष्टि एसोचैम की रिपोर्ट से भी होती है। ऐसे में इंश्योरेंस और एक्चुरियल साइंस का कोर्स करने वाले युवाओं के सामने अवसरों की कोई कमी नहीं होगी। आईसीए के चेयरमैन एनके श्यामसुखा कहते हैं कि भारत में कॉर्पोरेट सेक्टर के तेजी से आगे बढने और सरकारी तथा निजी बैंकिंग द्वारा अपना प्रसार करने के कारण प्रशिक्षित अकाउंटेंट्स की मांग में इस वर्ष और तेजी आएगी।
टेलीकम्युनिकेशन
देश संचार क्रांति के दौर से गुजर रहा है। भारत के विशाल बाजार को देखते हुए तमाम देशी-विदेशी कंपनियों ने यहां अपने पांव पसारे हैं। टेलीकम्युनिकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई के आंकडों के अनुसार नवंबर 2007 तक देश में मोबाइल फोन धारकों की संख्या 22.55 करोड तक पहुंच गई। भारतीय बाजार में जिस तरह से मोबाइल कंपनियां सक्रिय हैं, उसके लिए उन्हें डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग सभी के लिए एक्सपर्ट कर्मचारियों की जरूरत होती है।
एनिमेशन एवं गेमिंग
एप्टेक लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आर कृष्णन नैस्कॉम के आंकडों के आधार पर बताते हैं कि एनिमेशन एवं गेमिंग के क्षेत्र में वर्ष 2008 में भी प्रोफेशनल युवाओं की भारी डिमांड रहने की उम्मीद है। नैस्कॉम ने वर्ष 2008 में गेमिंग इंडस्ट्री के 55.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो जाने का अनुमान लगाया है। गेको एनिमेशन स्टुडियो के सीईओ परेश मेहता कहते हैं कि इस वर्ष एनिमेशन इंडस्ट्री में ही अकेले 3 लाख लोगों की जरूरत होगी। एक्सप‌र्ट्स की सबसे अधिक आवश्यकता भारतीय फिल्मों और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में होगी। इसका उदाहरण हनुमान रिट‌र्न्स के बाद आई तेजी है।
हॉस्पिटैलिटी
टूरिज्म के फलने-फूलने के कारण हॉस्पिटैलिटी भी इस साल सबसे अधिक रोजगार देने वाले सेक्टर्स में से एक होगा। इसमें सर्वाधिक रोजगार होटल्स-रेस्टोरेंट्स-रिजॉ‌र्ट्स, एयरपो‌र्ट्स तथा कॉर्पोरेट ऑफिसों में होंगे। एक अनुमान के अनुसार 2010 तक टूरिज्म दुनिया की सबसे बडी इंडस्ट्री होगी। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ वर्षो में अकेले भारत में होटल इंडस्ट्री में करीब 1,80,000 रिक्तियां होंगी।
आईटी/आईटीईएस
नैस्कॉम के ताजा आंकडों के अनुसार वर्ष 2006 में डोमेस्टिक बीपीओं मार्केट जहां 6 हजार करोड रुपये का था,जिसके वर्ष 2011 तक बढकर 30 हजार करोड रुपये तक पहुंच जाने की उम्मीद है। टीमलीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार आईटी इंडस्ट्री में इस साल 2.2 मिलियन जॉब अवसर सामने आएंगे। जबकि बीपीओ इंडस्ट्री में वर्ष 2010 तक 2.3 मिलियन लोगों को प्रत्यक्ष और 6.5 मिलियन अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। ं दिल्ली स्थित ए-सेट के डायरेक्टर उदय कुमार वैश्य कहते हैं कि प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों में नौकरी पाने के लिए जरूरी है कि संबंधित कोर्स उन प्रामाणिक संस्थानों से ही करें, जहां प्रैक्टिकल ट्रेनिंग अधिक से अधिक दी जाती हो और जहां सैन जैसे लेटेस्ट उपकरणों का प्रयोग करना सिखाया जाता हो।
एविएशन
भारत के एविएशन सेक्टर में देशी-विदेशी निजी व बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लगातार बढती संख्या के कारण इस फील्ड में एयरक्राफ्ट मेंटिनेंस इंजीनियर, पॉयलट, केबिन-क्रू मेंबर्स (एयर होस्टेस व फ्लाइट स्टीवर्ट), ग्राउंड व टिकटिंग स्टाफ की मांग इस वर्ष और बढेगी। 2008 में इस सेक्टर के 24 प्रतिशत की दर से विकास करने की उम्मीद है।
इंजीनियरिंग
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निर्माण बढने के कारण वर्ष 2008 में इंजीनियर्स की डिमांड में और इजाफा होने का अनुमान है। टीमलीज रिपोर्ट में कहा गया है कि सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत को हर साल करीब 50,000 इंजीनियर्स की जरूरत होती है। इस बारे में नारायणा एकेडमी के डॉ. गोपाल का कहना है कि इन परीक्षाओं में बैठने वाले युवाओं को अपनी दसवीं-बारहवीं कोर्स के फंडामेंटल्स को पूरी तरह क्लियर कर लेना चाहिए।
मैनेजमेंट
भारत में कॉर्पोरेट सेक्टर के लगातार मजबूत होने और आगे बढने के चलते मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग में भी खूब तेजी आई है। इसके लिए यदि आईआईएम या किसी अन्य टॉप मैनेजमेंट कॉलेज में एडमिशन मिल जाए, तो कहना ही क्या!
अन्य डिमांडिंग सेक्टर
उपर्युक्त क्षेत्रों के अलावा कई अन्य क्षेत्र भी हैं, जिनमें कोर्स करना जॉब की गारंटी साबित हो सकता है। इसमें ऑटोमोबाइल्स, एंटरटेनमेंट, इवेंट मैनेजमेंट, हेल्थ केयर-फार्मा, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री आदि प्रमुख हैं। टीमलीज रिपोर्ट के अनुसार इंडियन इंडस्ट्री को इस समय उत्पादन कर्मचारी, भवन निर्माण कर्मचारी, परिवहन उपकरण संचालक, प्रशिक्षित श्रमिक, जैसे-इलेक्ट्रिक फिटर, असेंबलर, माइनर, पैकेजर, फूड प्रोसेसिंग वर्कर जैसे लोगों की जरूरत है। सर्विस सेक्टर को होटल कीपर, हाउस कीपर, मैट्रन, वेटर, कॉल सेंटर ऑपरेटर, कस्टमर रिलेशन, बिलिंग जैसे कामों के लिए बडी तादाद में कुशल लोग चाहिए। इन सेक्टर्स में प्रशिक्षित लोग सैलॅरी के अलावा फ्री-लांस बेसिस पर भी खूब कमा सकते हैं। इसलिए युवाओं को अपनी रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुसार संबंधित कोर्स करके बेहतर करियर की राह पर कदम आगे बढाना चाहिए।

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