परिमल कुमार ने इस वर्ष सीबीएसई बोर्ड से बारहवीं (पीसीबी) की परीक्षा दी है। उसके पिता उसका एडमिशन किसी प्रतिष्ठित डेंटल कॉलेज में कराना चाहते हैं। लेकिन तमाम कॉलेजों की भीड में उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि उनके बेटे के लिए कौन-सा कॉलेज ठीक रहेगा। वहां चलाया जाने वाला कोर्स संबंधित आधिकारिक निकाय से मान्यता प्राप्त है या नहीं, वहां पढाई की गुणवत्ता कैसी है, कोर्स द्वारा ली जाने वाली फीस उनके बजट में है या नहीं! विकास सिंह ने छत्तीसगढ राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त एक विश्वविद्यालय के दिल्ली स्थित कैम्पस में प्रवेश लिया था। इस संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर से वे काफी प्रभावित थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक निर्णय में इस विश्वविद्यालय की डिग्री को अमान्य कर दिए जाने से वे चिंतित हो गए। कोर्ट का कहना था कि यूजीसी से मान्यता प्राप्त न होने के कारण इस विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे कोर्सो को मान्यता नहीं दी जा सकती। ऐसे में विकास सिंह जैसे हजारों विद्यार्थियों का करियर दांव पर लग गया। ये दोनों ही स्थितियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी और उसके द्वारा संचालित कोर्सो की परख आधिकारिक निकाय से जरूर कर लेनी चाहिए, अन्यथा युवाओं का करियर बनने की बजाय बिगड सकता है।
बाढ है संस्थानों की
भारत में शिक्षा हासिल करने वाले लोगों की बढती संख्या को देखते हुए बडे शहरों से लेकर छोटे शहरों तक में तमाम तरह के तकनीकी और गैर-तकनीकी संस्थानों की भी बाढ आ गई है। ऐसे में इसमें कौन-सा संस्थान असली है और कौन नकली, इसकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। संस्थान अपने बारे में तमाम तरह के दावे करते हैं, लोगों को लुभाने के लिए बडे-बडे विज्ञापन देते हैं। छात्रों को उनकी असलियत का पता तब चलता है, जब वे वहां एडमिशन ले चुके होते हैं। ऐसे स्थिति में यदि वे अपना प्रवेश रद्द कराना चाहते हैं, तो ली गई फीस लौटाने में संस्थान द्वारा आना-कानी की जाती है। इस तरह के फर्जी संस्थान खासकर प्रोफेशनल कोर्स चलाने वाले क्षेत्रों (जैसे-इंजीनियरिंग, एमबीए आदि) में अधिक हैं। इसके अतिरिक्त आजकल ऐसे संस्थान भी खूब देखने को मिलते हैं, जो एक संकरी सी इमारत में चलते हैं और बीए से लेकर एमबीए तक तथा इंजीनियरिंग से लेकर मेडिसिन तक हर तरह का कोर्स कराने का दावा करते हैं। यह अपने आप में संदेह पैदा करता है कि कोई संस्थान अलग-अलग स्ट्रीम के ढेर सारे कोर्स कैसे संचालित कर सकता है?
असली और नकली
कौन-सा शिक्षण संस्थान असली है और कौन-सा नकली, इस बारे में पहले से सही-सही पता लगाना काफी मुश्किल होता है। लेकिन माता-पिता के गाढे पसीने की कमाई महंगी पढाई में लगाने से पहले ऐसे संस्थानों की जांच-परख करना आज काफी जरूरी हो गया है। इसके लिए सबसे पहले तो आप जिस संस्थान में प्रवेश लेना चाहते हैं, उसके बारे में जानकारी सीधे उसी से लेने का प्रयास करना चाहिए। यदि कोई सरकारी निकाय ऐसे संस्थानों की मान्यता के लिए उत्तरदायी है, तो उस सरकारी निकाय की वेबसाइट से इस संस्थान के बारे में जानकारी हासिल करें।
रखें ध्यान इन बातों का
यदि आप फर्जी संस्थानों के चंगुल से बचकर वाकई किसी प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले संस्थानों के चयन पर ध्यान दें। इसके लिए निम्नलिखित बातों का जरूर ध्यान रखें :
इंटरनेट के माध्यम से संस्थान से सीधे संपर्क करें और वांछित जानकारी लें।
संस्थान के कोर्सो को मान्यता देने वाले निकाय की वेबसाइट पर संस्थान की स्थिति जांचें।
अच्छे संस्थान संपर्क के लिए कई फोन लाइनें मुहैया कराते हैं, जबकि संदेहास्पद संस्थान प्राय: एक या दो लाइन का ही इस्तेमाल करते हैं। इसमें भी कई बार लैंड लाइन नंबर नहीं होता।
जाली संस्थानों की वेबसाइट पर अंतर्विरोधी बातें दिख जाती हैं। कभी वे कहती हैं कि उनके कोर्सो को विदेशी संस्थान से मान्यता हासिल है, तो कभी उनका कहना होता है कि उन्हें जल्दी ही मान्यता मिल जाएगी। सच तो यह है कि प्रतिष्ठित संस्थान अपनी मान्यता के बारे में स्पष्ट रूप से बताते हैं।
जाली संस्थान अक्सर प्रतिष्ठित विदेशी या देशी संस्थानों से मिलता-जुलता नाम रखकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। इस फेर में कतई न पडें।
इन निकायों से करें जांच
भारत में अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने तथा उन पर नियंत्रण रखने के लिए कई बॉडीज की स्थापना की गई है। कोई संस्थान असली है या नकली, इसकी जांच करने के लिए इन निकायों की वेबसाइट देखी जा सकती है या फिर इनसे सीधे संपर्क किया जा सकता है। ऐसी बॉडीज का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है :
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) : भारत सरकार द्वारा स्थापित यूजीसी देश के सभी विश्वविद्यालयों पर नजर रखने, उनका नियमन करने तथा नए विश्वविद्यालयों को मान्यता देने का काम करती है। छात्रों को जाली संस्थानों से बचाने के लिए यह समय-समय पर ऐसे संस्थानों की सूची भी जारी करती है। कोई विश्वविद्यालय फर्जी है या नहीं, इसकी जांच आयोग की वेबसाइट से की जा सकती है।
वेबसाइट : www.ugc.ac.in
ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) : भारत में तकनीकी संस्थानों को खोलने, उनके द्वारा नए पाठयक्रम चलाने और उनका अनुमोदन करने का काम एआईसीटीई करती है। इसके सात रीजनल कार्यालयों (कानपुर, चंडीगढ, भोपाल, मुंबई, बंगलुरु, चंडीगढ तथा चेन्नई) से संपर्क कर तकनीकी संस्थाओं की जानकारी हासिल की जा सकती है। वेबसाइट : www.aicte.ernet.in
नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) : 1993 में स्थापित एनसीटीई का काम देश में टीचर्स एजुकेशन नेटवर्क को संचालित और नियोजित करना है। काउंसिल टीचर ट्रेनिंग का कोर्स चलाने वाले संस्थानों को मान्यता भी देती है। यहां से बीएड, एमएड, एमए-एजुकेशन आदि कोर्सो तथा इससे संबंधित संस्थानों की जानकारी ली जा सकती है। इसके रीजनल कार्यालय भोपाल, जयपुर, बंगलुरु तथा भुवनेश्वर में हैं। वेबसाइट : www.ncte.in.org
डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल (डीईसी) : इसकी स्थापना डिस्टेंस एजुकेशन और ओपन यूनिवर्सिटी सिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए की गई है। इस क्षेत्र के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की जानकारी डीईसी से ली जा सकती है। वेबसाइट : www.dec.ac.in
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) : यहां से देश में लॉ से संबंधित सभी संस्थानों के बारे में जानकारी पाई जा सकती है। यह कानूनी शिक्षा के क्षेत्र के बारे में न केवल सुझाव देती है, बल्कि सुधार के कदम भी उठाती है। वेबसाइट : www.barcouncilofindia.nic.in
इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) : कृषि के क्षेत्र में रिसर्च एवं नई खोजों के लिए प्रतिबद्ध आईसीएआर कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों को अनुदान भी मुहैया कराता है। इससे कृषि से संबंधित कोर्स चलाने वाले संस्थानों की जानकारी ले सकते हैं। वेबसाइट : www.icar.org.in
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई): यह चिकित्सा से संबंधित पाठयक्रमों को चलाने वाले संस्थानों का नियमन करती है। इसके माध्यम से मेडिकल क्षेत्र के संस्थानों के बारे में जाना जा सकता है। वेबसाइट : www.mciindia.org
सेंट्रल काउंसिल फॉर इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम): भारत की परंपरागत चिकित्सा शिक्षा पद्धतियों-आयुर्वेद, यूनानी, तिब्बती आदि से संबंधित कोर्सो और इन्हें संचालित करने वाले संस्थानों की वैधानिक संस्थानों की जानकारी इस काउंसिल से ली जा सकती है। वेबसाइट : www.ccimindia.org
सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी (सीसीएच): सीसीएच होम्योपैथी से संबंधित कोर्स चलाने वाले विश्वविद्यालयों व संस्थानों को मान्यता प्रदान करता है। लेकिन इसके लिए उन संस्थानों को अपने कोर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षा से जुडी हर तरह की जानकारी काउंसिल को उपलब्ध करानी होती है। वेबसाइट : www.cchindia.com
फॉर्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई): डीफार्मा, बीफार्मा जैसे कोर्स कराने वाले संस्थानों के बारे में जानकारी के लिए पीसीआई से संपर्क किया जा सकता है। वेबसाइट : www.pci.nic.in
डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई): बीडीएस, एमडीएस जैसे डेंटल कोर्स चलाने वाले संस्थानों की जानकारी डीसीआई से मिल सकती है। वेबसाइट : www.dciindia.org
इंडियन नर्सिग काउंसिल (आईएनसी): नर्स, मिडवाइफ, हेल्थ विजिटर्स आदि से संबंधित पाठयक्रम (जैसे-नर्सिग में डिप्लोमा, डिग्री, पीएचडी आदि) चलाने वाले मान्यता प्राप्त संस्थानों के बारे में आईएनसी से पता किया जा सकता है। वेबसाइट : www.indiannurshingcouncil.org
काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (सीओए): आर्किटेक्चर से संबंधित कोर्स चलाने वाले संस्थानों की वैधता से संबंधित जानकारी इस निकाय से हासिल की जा सकती है। वेबसाइट : www.coa.gov.in
हैं अपवाद भी
हालांकि कुछ संस्थान ऐसे भी होते हैं, जो काफी प्रतिष्ठित होते हैं, लेकिन इनके सभी कोर्सो को सरकारी निकाय से मान्यता नहीं मिली होती, या फिर एक निश्चित समय के लिए मिली होती है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इन संस्थानों का प्लेसमेंट रिकॉर्ड शानदार होता है। ऐसे संस्थान में एडमिशन लेने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद अपने स्तर पर हर तरह से संस्थान और उसके कोर्सो की गुणवत्ता की जांच जरूर कर लें। डिग्री से ज्यादा स्किल है जरूरी कॉर्पोरेट कल्चर का तेजी से प्रसार होने और नए-नए क्षेत्र उभरकर सामने आने (खासकर निजी क्षेत्र में) से स्किल्ड लोगों की मांग काफी बढ गई है। इस बारे में टाइम के डायरेक्टर (दिल्ली) उल्हास वैरागकर का कहना है कि निजी क्षेत्र उन्हीं को प्राथमिकता देता है, जो क्वालिटी के साथ बढिया रिजल्ट दे सकें। उन्हें इससे कोई खास फर्क नहीं पडता कि उस व्यक्ति ने मान्यता प्राप्त संस्थान से पढाई की है या नहीं। वह जिस काम के लिए नियुक्ति कर रहा है, उसे उसमें दक्ष व्यक्ति चाहिए होता है। यही कारण है कि इन दिनों तमाम संस्थान (कई बडे संस्थान भी) सरकारी निकायों से एफिलिएशन या मान्यता हासिल करने (सरकारी संस्कृति और बाबूगिरी के कारण) को महत्व न देते हुए क्वालिटी एजुकेशन पर जोर देते हैं और स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री की डिमांड के मुताबिक गढने की कोशिश करते हैं।
किस तरह का है संस्थान
इस बात को जानना भी जरूरी होता है कि आप जिस संस्थान में प्रवेश लेने जा रहे हैं, उसका स्तर कैसा है यानी वह डायरेक्ट यूनिवर्सिटी है, ऑफ शोर कैम्पस है या फिर मात्र स्टडी सेंटर। आपकी जानकारी के लिए आइए बताते हैं कि किस-किस तरह के संस्थान होते हैं :
केंद्रीय विश्वविद्यालय : केंद्रीय विश्वविद्यालय भारत सरकार के संसदीय अधिनियम के तहत गठित किए जाते हैं, जिनके चांसलर आमतौर पर राष्ट्रपति होते हैं। इन्हें केंद्र सरकार से सहायता मिलती है।
राज्य विश्वविद्यालय : राज्य विश्वविद्यालय संबंधित राज्य द्वारा स्थापित और संचालित किए जाते हैं। इन्हें यूजीसी से मान्यता और सहायता मिलती है। इसके चांसलर वहां के राज्यपाल होते हैं।
निजी विश्वविद्यालय : सोसायटी रजिस्ट्रेशन ऐक्ट, 1860, किसी राज्य के कानून या कंपनीज ऐक्ट, 1956 के सेक्शन-25 के तहत स्टेट या सेंट्रल ऐक्ट के तहत किसी प्रायोजक द्वारा स्थापित यूनिवर्सिटी। स्टेट ऐक्ट के तहत स्थापित प्राइवेट यूनिवर्सिटी उस राज्य की सीमा में ही संचालित की जा सकती है। पांच वर्ष पूरा करने के बाद ही ऐसी यूनिवर्सिटी निर्धारित शर्तो के तहत बाहर अपने कैम्पस बना सकती है।
स्टडी सेंटर : यूनिवर्सिटी द्वारा खासकर डिस्टेंस एजुकेशन के तहत छात्रों की सहायता के लिए गठित मान्यता प्राप्त केंद्र।
ऑफ शोर कैम्पस : प्राइवेट यूनिवर्सिटी द्वारा विदेश में स्थापित और संचालित कैम्पस।
ऑफ कैम्पस सेंटर : प्राइवेट यूनिवर्सिटी द्वारा मुख्य कैम्पस से बाहर उसी राज्य या किसी दूसरे राज्य में संचालित सेंटर।
ऐसे तलाशें संस्थान पता करें कि आप जो कोर्स करना चाहते हैं, उसके लोकप्रिय संस्थान कौन-कौन हैं।
चुने गए संस्थान की प्रामाणिकता और पढाई के स्तर के बारे में वहां से कोर्स कर चुके छात्रों से पता करने की कोशिश करें।
चमक-दमक से प्रभावित न होते हुए कोर्स की गुणवत्ता और संस्थान की प्रतिष्ठा को महत्व दें।
कम फीस या घर के करीब होने भर से ही प्रवेश न लें, बल्कि संस्थान की पॉपुलरिटी पर ध्यान दें।
यदि किसी अच्छे संस्थान में उस साल प्रवेश नहीं मिल पाता, तो हताश होने की बजाय एक-दो साल की तैयारी करके खुद को उसके लायक बनाएं।
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